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मुसलमानों की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार?

      देश की आज़ादी को 70 वर्ष बीत गये, लेकिन देश के सामने एक मुद्दा हर बार उठता है- "मुसलमानों का विकास"।      20वीं शताब्दी में अंग्रेजी सरकार ने मुसलमानों को सरकारी सेवा में नियु...

"बचेंगी बेटियां, तभी तो पढेंगी बेटियां"

कभी-कभी सोचता हूं कि बहुत नीचले स्तर किस्म के होते हैं वो लोग जो कोख में ही बच्चियों को मार देते हैं, लेकिन मन को थोड़ी सी तसल्ली इस बात से मिलती है कि शायद 20-25% लोग ही इस वजह से बेटी ...

एक महान क्रांतिकारी, जिसे गुमनाम कर दिया गया- नेताजी।

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देश आजाद होने के बाद संसद में कई बार माँग उठती है कि कथित विमान-दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए सरकार कोशिश करेे मगर प्रधानमंत्री नेहरूजी इस माँग को प्रायः दस वर्षों तक टालने में सफल रहते हैं। भारत सरकार इस बारे में ताईवान सरकार (फारमोसा का नाम अब ताईवान हो गया है) से भी सम्पर्क नहीं करती। अन्त में जनप्रतिनिगण जस्टिस राधाविनोद पाल की अध्यक्षता में गैर-सरकारी जाँच आयोग के गठन का निर्णय लेते हैं। तब जाकर नेहरूजी 1956 में भारत सरकार की ओर से जाँच-आयोग के गठन की घोषणा करते हैं। लोग सोच रहे थे कि जस्टिस राधाविनोद पाल को ही आयोग की अध्यक्षता सौंपी जायेगी। विश्वयुद्ध के बाद जापान के युद्धकालीन प्रधानमंत्री सह युद्धमंत्री जनरल हिदेकी तोजो पर जो युद्धापराध का मुकदमा चला था, उसकी ज्यूरी (वार क्राईम ट्रिब्यूनल) के एक सदस्य थे- जस्टिस पाल।  मुकदमे के दौरान जस्टिस पाल को जापानी गोपनीय दस्तावेजों के अध्ययन का अवसर मिला था, अतः स्वाभाविक रुप से वे उपयुक्त व्यक्ति थे जाँच-आयोग की अध्यक्षता के लिए  मगर नेहरूजी को आयोग की अध्यक्षता के लिए सबसे योग्य व्यक्ति शा...