"बचेंगी बेटियां, तभी तो पढेंगी बेटियां"
कभी-कभी सोचता हूं कि बहुत नीचले स्तर किस्म के होते हैं वो लोग जो कोख में ही बच्चियों को मार देते हैं, लेकिन मन को थोड़ी सी तसल्ली इस बात से मिलती है कि शायद 20-25% लोग ही इस वजह से बेटी नहीं चाहते होंगे क्योंकि आज 21वीं सदी में भी बच्चियां जघन्य अपराधों, जैसे- बलात्कार, छेड़छाड़, हत्या जैसी घटनाओं से सुरक्षित नहीं हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां नारी को देवी मानकर पूजा किया जाता है। लेकिन आज के समय में ये कहते हुए शर्म आती है। दिन- प्रतिदिन महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढते जा रहे हैं।
22 जनवरी, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटियों को बचाने तथा उनकी तरक्की के लिए हरियाणा से 'बेटी बचाओ, बेटी पढाओ' नामक अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य 0-6 वर्ष तक के लिंगानुपात को बेहतर करना है। जून, 2015 में हरियाणा के बीबीपुर गांव के सरपंच ने अपनी बेटी के साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडीया पर #SelfiWithDaughter हैशटैग के माध्यम से इस अभियान को आगे बढाने की कोशिश की। अगस्त, 2016 में रियो ओलिंपिक की कांस्य पदक विजेता 'साक्षी मलिक' को इस अभियान का ब्रांड अंबेसडर बनाया गया। आज हम बेटी बचाओ की बात तो करते हैं लेकिन जब खुद पर आरोप लगता है तो हम ये नारा भूल क्यों जाते हैं? बेटी बचाने की बात करेंगे लेकिन खुद के किसी खास व्यक्ति पर ये घिनौने आरोप लगते हैं तो हम ये नारा भूल जाते हैं। ये सब मैं इसलिए कह रहा हूं कि पिछले वर्ष 4 जून, 2017 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के माखी गांव की एक लड़की के साथ बलात्कार हुआ, जिसका आरोप वर्तमान सरकार के विधायक पर लगा। वो लड़की अपनी शिकायत लेकर पुलिस थाने गयी, लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी गयी और लगभग 10 महीने तक इस मामले को दबाए रखा गया। ये मामला पुन: संज्ञान में तब आया, जब बीते 3 अप्रैल, 2018 को पीड़ीता के पिता की विधायक के भाई द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी। मामला बाहर आने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री ने भी इस पर संज्ञान लिया और अधिकारियों को इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए और विशेष जांच दल का गठन किया गया। 10 अप्रैल, 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। बलात्कार का आरोपी विधायक है या नहीं, ये कहना जल्दीबाजी होगी। लेकिन विधायक को लेकर सरकार के रूख पर सवाल जरूर उठता है कि जिस व्यक्ति पर बलात्कार का आरोप लगा हो, वो अभी भी आपकी पार्टी से विधायक है। क्या आपका ये दायित्व नहीं बनता कि आरोपी विधायक को पार्टी से बाहर करके और तत्काल उसके भाई के साथ ही गिरफ्तार करके जांच पूरी होने तक सलाखों के पीछे रखा जाए? सूबे (उत्तर प्रदेश) की सरकार तो अपराधियों के खिलाफ जिस तरह से कारवाई कर रही है, उसमे कोई संदेह नहीं है। पिछले एक साल में 1300 से ज्यादे मुठभेड़ हुए जिसमे लगभग 44 से ज्यादा इनामी बदमाश मारे गये और लगभग 3200 अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचे। लेकिन जब खुद के विधायक पर इस तरह के घिनौने आरोप लगे हों, तब आपका रूख नरम क्यों पड़ जाता है? आपकी इस चुप्पी को देखकर ये क्यों ना समझा जाए कि विधायक को पार्टी से बाहर करके जेल में डालने से आगामी विधानपरिषद चुनाव में आपका एक वोट कम हो जाएगा। पिछले वर्ष BJP के एक वरिष्ठ नेता ने विपक्ष की एक महिला नेत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी किया, जिसको बाद उस नेता को कुछ दिनों के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया। उसके बाद उस महिला नेत्री के समर्थकों द्वारा उस नेता की पत्नी और बेटी को अभद्र धमकियां दी जाने लगी, जिसके विरोध में BJP नेताओं द्वारा 'बेटी के सम्मान में, भाजपा मैदान में' नामक एक अभियान चलाया गया, लेकिन आज जब खुद के विधायक पर बलात्कार का आरोप लगा तो, BJP ये नारा भूल क्यों गयी? इसी तरह जम्मू और कश्मीर के कठुआ में एक आठ वर्षीय बच्ची का बलात्कार करके हत्या कर दिया गया। ये तो सत्य है कि जब बेटा पैदा होता है आज भी घरों में शोहर होते हैं, लेकीन जब वही बेटा बड़ा होकर हैवान बन जाए तो फिर इस समाज का क्या होगा? जम्मू & कश्मीर और उत्तर प्रदेश के उन्नाव की घटना की तूलना करके कुछ तथाकथित पंथनिरपेक्ष लोग सांप्रदायिक कार्ड खेलना शूरू कर दिए हैं। बेटी, बेटी होती है। मैं लोगों से ये अपील करना चाहूंगा कि बलात्कार जैसे अतिजघन्य अपराधों पर सांप्रदायिक कार्ड न खेलकर अपराधियों को कड़ी सजा देने की मांग की जाए तो बेहतर होगा। ये सिर्फ एक प्रदेश की बात नहीं है या एक धर्म की बात नहीं है, बल्कि ये पूरे देश में हो रहा है और किसी भी धर्म की बच्ची के साथ हो सकता है और हो रहा है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के एक रिपोर्ट के अपनुसार, 95% बलात्कार के मामलों में अपराधी पीड़ीत को भली-भांति जानते हैं। जैसे- पड़ोसी, घर के सदस्य और रिश्तेदार, साथ में काम करने वाले कर्मचारी, आदि इन घटनाओं को अंजाम देते हैं। 2015 में जहां बलात्कार के 34,000 मामले दर्ज किए गये, वहीं 2016 में बलात्कार के 38,947 मामले दर्ज किए गये। ये दर्शाता है कि 2012 में घटित हुए निर्भया कांड के बाद 2013 में बने निर्भया कानून के बाद भी बलात्कार के मामलों में कमी होने की बजाए हर साल बहुत ज्यादे वृध्दि होती गयी।
दक्षिण अफ्रिका, स्वीडेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड के बाद भारत विश्व का पांचवां ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा बलात्कार होते हैं। भारत अब एक ऐसा देश बन गया है, जहां बलात्कार आम बात हो गयी है। यहां हर दिन 90 से ज्यादे इस तरह के मामले दर्ज होते हैं। यहां हर वर्ष इस घटना में अप्रत्याशित वृध्दि हो रही है।
हमारे देश भारत में जिस तरह अनर्गल बातों को लेकर रोजाना आंदोलन, तोड़फोड़, अनशन, आदि होते रहते हैं, उस तरह इन अतिजघन्य अपराधों को रोकने हेतु सरकार पर दबाव बनाकर कानून बनाने के लिए आजतक कोई आंदोलन या आमरण अनशन नहीं हुआ। हम लोग सोशल मीडीया पर कुछ दो-चार लाइनें लिखकर शांत हो जाते हैं। ये बात मैं सबके लिए कह रहा हूं, चाहे वो मैं ही क्यों ना हूं। जरूरत हमें कि हम फालतू के आंदोलनों, अनशनों का समर्थन ना करके बलात्कार, छेड़छाड़, हत्या जैसी घटना को रोकने के लिए आंदोलन और अनशन के द्वारा कानून बनाने तथा उसपर निष्पक्षता और कड़ाई से पालन करने और करवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाएं। तभी हम भारत को विश्व गुरु डना सकते हैं। वर्ना भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना, सिर्फ सपना ही रह जाएगा।
देवालय में बजते शंख की ध्वनि है बेटी,
देवताओं के हवन यज्ञ की अग्नि है बेटी।
खुशनसीब हैं वो जिनके आँगन में है बेटी,
जग की तमाम खुशियों की जननी है बेटी।।
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