----------------#शुद्र_बनाम_दलित---------------

शुद्र और दलित भारतीय राजनीति का ऐसा चूल्हा जिसपर सत्ता की रोटी हमेसा बनती आयी है , आमजन मानस की स्थिति ऐसी कर दी है कि लोग समझ ही नही पाते कि शुद्र क्या है और दलित क्या, लोगो से यदि गलती से पूछ बैठो की शुद्र और दलित की परिभाषा तो ज्यादातर को ये ही नही पता कि दोनों बिल्कुल अलग है और आपस मे कोई संबंध नही रखते , इवन उन्हें शुद्र और दलित का अर्थ छोटी जाती के लोग बस यही समझ मे आता है जो सरासर गलत है ।आज कल के तथाकथित दलित चिंतक ऐसे भाषण और कार्य कर रहे है जिससे न तो दलितों का भला होने वाला है ना तो समाज का इससे सिर्फ इनका ही भला होगा आइये आज दलित और शूद्र के फर्क को समझते है ताकि हम इस गंदी राजनीति से खुद को दूर रख सकें --

#शुद्र -- वैदिक संस्कृति में समाज को चार हिस्सो में बांटा गया जिनका वर्गीकरण वर्टिकल था - बौद्धिक , रक्षिणक, वाणिज्यिक, श्रमिक AKA ब्राम्हण , क्षत्रिय, वैश्य व शुद्र वर्गीकरण का आधार व्यक्ति की दक्षता थी जिसका चयन वर्णाश्रम व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के दौरान की जाती थी जो शिक्षण संस्थानों में प्रवेश नही करता था उसे शुद्र कहा जाता था ।। जन्म से सभी शुद्र ,संस्कार (शिक्षण) से दूसरा जन्म लेने पर दूसरे वर्णों में प्रवेश होता था ,-- 
जन्मना जायते शूद्रः
संस्कारात् भवेत् द्विजः

#शुद्र_का_अर्थ --

शूद्र शब्द 'शुच्' धातु से सम्बद्ध है, जिसका अर्थ होता है, संतप्त होना। कहा जाता है कि ‘जो खिन्न हुए और भागे (भागने का अर्थ शिक्षण से भागने से है), शारीरिक श्रम करने के अभ्यस्त थे उन्हें शूद्र बना दिया गया ।

बुद्ध के अनुसार जिन व्यक्तियों का आचरण आतंकपूर्ण और हीन कोटि का था, वे सुद्द कहलाने लगे (शुद्र और सुद्द दोनो एक ही है)।

वैदिक शास्त्रों में कही भी शुद्र को अछूत , नीच ,गुलाम(दास) या किसी से कमतर नही कहा गया अपितु समान दर्जा प्राप्त था ।।

#दलित --
दलित शब्द के बारे में जानने के पहले हमें ये जानना चाहिए कि दलित शब्द जिस समय प्रचलन में आया उस समय किसके संदर्भ में इसका इस्तेमाल किया है --

दलित शब्‍द का शाब्दिक अर्थ है- दलन किया हुआ। इसके तहत वह हर व्‍यक्ति आ जाता है जिसका शोषण-उत्‍पीडन हुआ है।
दलित का सामान्य अर्थ - पिडीत, शोषित, दबा हुआ, खिन्न, उदास, टुकडा, खंडित, तोडना, कुचलना, दला हुआ, पीसा हुआ, मसला हुआ, रौंदाहुआ, विनष्ट ।।
फलित अर्थ -  पिडामुक्त, उच्च, प्रसन्न, खुशहाल, अखंड, अखंडित, जोडना, समानता, एकरुप, पूर्णरूप, संपूर्ण

#दलित_शब्द_का_प्रथम_प्रयोग --
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विवेक कुमार बताते हैं कि दलित शब्द का जिक्र सबसे पहले 1831 की मोल्सवर्थ डिक्शनरी में पाया जाता है, मैंने ये आर्टिकल जब पढ़ा तो सोचा कि चलो देखते है कि क्या वाकई दलित शब्द प्रथम बार यही प्रयोग हुआ तो जवाब मिला नही मोल्सवर्थ की
डिक्शनरी में जो शब्द प्रयोग हुआ है वो है "दलदपट" जिसका अर्थ होता है शारीरिक रूप से मजबूत जानवर या इंसान ।।

बहोत से दलित चिंतक कहते है कि  भीमराव अंबेडकर ने इस शब्द को अपने भाषणों में प्रयोग किया था तो उनकी जानकारी के लिए बता देता हूँ कि अम्बेडकर ने भी कभी दलित शब्द का इस्तेमाल नही किया बल्कि वो "डिप्रेस्ड क्लास" का ही इस्तेमाल करते थे ।।

#दलित_शब्द_एक_ब्राम्हण_की_देन --
ब्राम्हणो की हर चीज़ का विरोध लड़ते हो न तो करो विरोध और निकाल फेको दलित शब्द को खुद से 
1921 से 1926 के बीच ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल ‘स्वामी श्रद्धानंद’ ने भी किया था. दिल्ली में दलितोद्धार सभा बनाकर उन्होंने दलितों को सामाजिक स्वीकृति की वकालत की थी यहाँ दलित एक जाति न होकर वो वर्ग था जो गरीब था ।

दलित शब्द का प्रयोग प्रचलन में कभी नही रहा बल्कि इसका प्रयोग गरीब और दरिद्र के संदर्भ में ही किया जाता था उदाहरण --
1929 में लिखी एक कविता में राष्ट्रकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने भी ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जो इस बात की पुष्टि करता है कि ये शब्द प्रचलन में तो था, लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं किया जाता था. 1943 में ‘#अणिमा’ नाम के काव्य संग्रह में उनकी ये कविता छपी.
दलित जन पर करो करुणा।
दीनता पर उतर आये प्रभु,
तुम्हारी शक्ति वरुणा।
‘दलित’ शब्द दरअसल लोकभाषा के शब्द दरिद्र से आया है. किसी जाति विशेष से ये शब्द कभी नहीं जुड़ा फिर दलित दलित दलित क्यो जबकि ये जातिसूचक या जातिवादित शब्द ही नही है एक ब्राम्हण का यदि शोषण हुआ दरिद्र है तो वो भी दलित है ये सनद रहे ।।

#विशेष --
शुद्र वो है जो अथर्ववेद में कल्याणी वाक (वेद) का चयन पठन पाठन करते है , शुद्र वो है जो शिक्षित होकर ऐतरेय ब्राह्मण का रचना करते है  "महीदास इतरा "(शूद्र) शुद्र पुत्र थे । और एक तुम हो जो न तो शुद्र हो न दलित तुम रीढ़विहीन केंचुए हो राजनैतिक महत्वाकांक्षा की बली चढ़ रहे हो और उस संग्राम का हिस्सा बन रहे हो जिससे तुम्हारा भला कभी नही हो सकता क्योंकि उकसाने से दूसरे लोग भी प्रतिरोध करेंगे क्योंकि क्रिया पर प्रतिक्रिया ये प्रकृति का नियम है ।।

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